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मङ्गल, १० कात्तिक २०८३
जलवायु संकटम विश्व नेतृत्वके ढिलाइप्रति प्रधानमन्त्री शाहके प्रश्न
शुक्र, ०९ असोज २०८३ | थारु टीभी संवाददाता 71 0

प्रधानमन्त्री वालेन्द्र शाह नेपालके बाढी, जलवायु परिवर्तन ओ ओमेसे उत्पन्न मानवीय ओ विकास संकटहे संयुक्त राष्ट्रसंघके महासभामार्फत विश्व समुदायसामु प्रस्तुत करल बाट । 
संयुक्त राष्ट्रसंघके ८१औँ महासभाहे सम्बोधन कर्ती प्रधानमन्त्री शाह हिमालयसे आइल जलवायु संकटके चेतावनीहे विश्व अब सुन्ना किल नैहोक ओकर अनूसार तत्काल काम करेपर्ना जोड देहेल बाट । प्रधानमन्त्री शाह चार साताआघे नेपालके हिमाली क्षेत्रम आइल विनाशकारी बाढीहे ‘हिमालयन सुनामी’ कना उल्लेख कर्ती भोटेकोशी–त्रिशूली विपद् नेपालमे किल सीमित त्रासदी नैहोके विश्वके लाग चेतावनी हूइल बतैल बाटै ।
विकास, लोकतन्त्र, शान्ति ओ युवा राष्ट्रके आशाबारे बोलेपर्ना अवस्थाम आप्नह मृत्यु ओ विनाश, आफन्तके प्रतीक्षाम रहल परिवार, बेपत्ता नागरिक ओ बाढीसे पूहाइल पुल, सडक, विद्यालय, घर ओ जीविकेपार्जनके साधनबारे बोल्ना बाध्य हूइल उहा बतैल ।

जलवायु संकटबारे वैज्ञानिकहूक्र लम्मा समयसे देती आइल चेतावनीहे विश्वके राजनीतिक नेतृत्वहे आवश्यक गति ओ स्तरम कार्यान्वयनम रूपान्तरण करे नैसेकल प्रधानमन्त्री शाहके भनाइ रह ।
तापक्रम वृद्धि हुँइलेसे हिमालयके संवेदनशील पारिस्थितिक प्रणाली अस्थिर बन्ती गील, पर्माफ्रोस्ट पीगल्के हिमाली ढलान कमजोर हूइल ओ हिमपहिरो, बाढी, पहिरो ओ अन्य जोखिम बढ्ती रहल उहा बतैल । ‘जलवायु परिवर्तनसे सीमा नैचिन्ना’ कना सन्देश देती उहा हिमनदी ओ बाढीसे पासपोर्टम भिसा लगाके यात्रा नैकर्ना टिप्पणी कर्ल ।
सम्बोधनके क्रमम प्रधानमन्त्री शाह विपद्पाछे नेपालहे सहयोग कर्ना भारत, चीन, संयुक्त राष्ट्रसंघीय प्रणाली, मानवीय सहायता निकाय, परोपकारी संस्था ओ विश्वभरके नागरिकप्रति आभार व्यक्त कर्ल ।
उहा कम्तीम १ हजार ४ सय जनाके मृत्यु पुष्टि हूइल ओ ६ हजारसे ज्यादा मनै अभिन बेपत्ता रहल उल्लेख कर्ती भौतिक पुनःस्थापनाके आवश्यकता कुल गार्हस्थ्य उत्पादनके करिब १० प्रतिशत बराबर रहल प्रारम्भिक मूल्यांकन प्रस्तुत कर्ल ।
विश्वके कुल हरितगृह ग्यास उत्सर्जनम नेपालके योगदान ०.१ प्रतिशतसे कम होके फेन  जलवायु संकटके भारी मूल्य नेपालसे चुकैती रहल प्रधानमन्त्री शाह बतैल ।
हिमनदी पाछे हट्ना, हिमाली ढलान अस्थिर हुइना ओ नदीके प्रवाह अनिश्चित बन्ती जैना के कारण नेपालके विकास उपलब्धि उपर समेत जोखिम थपल उहाके भनाइ बाटन् । जलवायु विपद् नेपालके लाग मानवीय संकट किल नैहोके विकास संकटसमेत हूइल उहा बतैल ।
जलवायु परिवर्तनहे कोनो देश ओ महादेशहे दोष देना विषय नैबनाके साझा जिम्मेवारी ओ ऐक्यबद्धताके आधारम आघे बढेपर्ना प्रधानमन्त्री शाह जोड देल ।
जलवायु परिवर्तनसम्बन्धी संयुक्त राष्ट्रसंघीय संरचनाअन्तर्गत स्वीकार करल ‘साझा तर विभेदित जिम्मेवारी ओ सम्बन्धित क्षमता’के सिद्धान्तहे व्यवहारम कार्यान्वयन करेपर्ना उहा बतैल ।
ऐतिहासिक रूपम ज्यादा योगदान करल ओ प्रतिक्रिया देना ज्यादा क्षमता हूइल पक्षसे ज्यादा जिम्मेवारी लेहेपर्ना उहाके धारणा रहे ।नेपाल–भारत–चीनबीच ‘हिमालयन क्लाइमेट रेजिलियन्स मेकानिज्म’ प्रस्ताव
प्रधानमन्त्री शाह नेपाल, भारत ओ चीनके नेतृत्वम ‘हिमालयन क्लाइमेट रेजिलियन्स मेकानिज्म’ स्थापना कर्ना प्रस्ताव करल बाटै ।

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