logo
मङ्गल, १० कात्तिक २०८३
संरक्षण ओ विकास सँगसँगे लैजैपर्ना ः मन्त्री चौधरी
बुध, ०७ असोज २०८३ | थारु टीभी संवाददाता 53 0

राष्ट्रिय संरक्षण सम्मेलन २०२६ बुधबारसे सुरु हूइल बा । दुई दिनसम्म सञ्चालन हुइना सो सम्मेलन २० औं राष्ट्रिय संरक्षण दिवसके अवसर पार्के सञ्चालन हूइल बा । 
सम्मेलनके बुधबार उद्घाटन कर्ती कृषि, वन ओ पर्यावरणमन्त्री गीता चौधरी संरक्षण ओ विकासहे एकर ओकर विरोधी नैहोके संरक्षण, जीविकेपार्जन ओ राष्ट्रिय समृद्धि सँगसँगे आघे बढैपर्ना  बताइल बाटै  । उहाँ एैना दिनम संरक्षण ओ विकास एकसाथ आगे लैजैपर्ना  बताइल बाटै  । 
मन्त्री चौधरीे पैलक दिनम नेपाल संरक्षणके क्षेत्रम प्राप्त करल उपलब्धिम किल सन्तुष्ट बैठसेक्ना  अवस्था नैहूइल बताइल बाटै । सो अवसरम बोल्ती उहाँ नेपालके जैविक विविधता पहिलक दिनम गम्भीर दबाबम रहल बताइल बाटै । 
उहाँ कलै, “वन अतिक्रमण, चोरी सिकार, अवैध व्यापार, वन डढेलो, मिचाहा प्रजातिके विस्तार, विषादीके प्रयोग, जल ओ वायुप्रदूषण, बासस्थान क्षयीकरण ओ मानव–वन्यजन्तु द्वन्द्वजस्ते प्रमुख चुनौतीसे नेपालके जैविक विविधताउपर समस्या सिर्जना हूइती रहल बा  ।”
मन्त्री चौधरीे वन्यजन्तु संरक्षणसँगे स्थानीय समुदायके जीवन, जीविकेपार्जन ओ सुरक्षा सुनिश्चित कर्ना ओहोर सरकार लग्ती रहल बताइल बाटै  । उहाँ मानव–वन्यजन्तु द्वन्द्व व्यवस्थापनम किल सीमित नैहोके दिगो सहअस्तित्व कायम कर्नातर्फ लक्षित हुइपर्ना जोड देहेल बाटै  । 
सरकार यहे आर्थिक वर्षसे मानव–वन्यजन्तु सहअस्तित्व कार्यक्रमहे राष्ट्रिय बजेट प्रणालीम समावेश करल बतैती मन्त्री चौधरी संरक्षण क्षेत्रके सीमाभित्रर किल सीमित धेर नैहूइना बताइल बाटै । उहाँ कलै, “संरक्षण कलक सीमाविहीन विषय हो । जैविक विविधताके संरक्षणके लाग अन्तरदेशीय समन्वय ओ सहयोग आवश्यक बा ।”
उहाँ कलै, “प्रकृति प्रशासनिक सीमा नैचिहिन्ना । वन्यजन्तुके आवत–जावत, नदीके प्रवाह, जैविक प्रणाली ओ पारिस्थितिकीय सेवाहे फेन प्रशासनिक सीमा नैमन्ना । तबे संरक्षणके लाभ फेन संरक्षित क्षेत्रके सीमाभित्रर किल सीमित नैहूइ ।” 
स्वच्छ पानी, स्वच्छ हावा, जलवायु नियमन, परागसेचन, कृषि उत्पादन, पर्यटन ओ स्थानीय जीविकोपार्जनसे राष्ट्रिय अर्थतन्त्रसम्म प्रकृतिके योगदान फैलल बतैती मन्त्री चौधरी भूपरिधीस्तरीय संरक्षण ओ प्रकृतिम आधारित समाधान खोजेपर्नामे जोड देहेल बाटै । 
मन्त्री चौधरीे वन्यजन्तु ओ राष्ट्रिय निकुञ्ज व्यवस्थापनम निरन्तर सुधार हूइती रहल जानकारी देती नयाँ चिडियाखाना स्थापना ओ सञ्चालन, वन्यजन्तु उद्धार व्यवस्थापन, वन्यजन्तु पालनसम्बन्धी मापदण्ड ओ वन्यजन्तु कल्याणके विषयमे आवश्यक नीति ओ मार्गदर्शन तयार ओ परिमार्जन कर्ना कामम मन्त्रालय लागी परल जानकारी देहेल बाटै । 
सो कार्यक्रमम कृषि, वन ओ पर्यावरण मन्त्रालयके सचिव डा. राजेन्द्रप्रसाद मिश्र नेपाल संरक्षणम प्राप्त करल उपलब्धिहे मुलुकके आर्थिक समृद्धिसँग जोडेपर्ना बताइल बाटै । 
उहाँ कलै जलवायु परिवर्तनके प्रत्यक्ष असर संरक्षणम फेन परल बतैती लम्मा समयसे करल जैविक विविधताके संरक्षण जलवायुजन्य विपतसे थप चुनौती थपदेहेल बताइल बाटै । 
कार्यक्रमम अन्तर्राष्ट्रिय प्रकृति संरक्षण सङ्घ (आइयूसिएन) के राष्ट्रिय प्रतिनिधि डा. नरेन्द्रमान बाबु प्रधानसे विकास ओ संरक्षणम एक्के सँग लैजै पर्ना म जोड देहेल बाटै  । उहाँ सम्मेलनसे पारित एजेण्डाहे अन्तर्राष्ट्रिय प्रकृति संरक्षण सङ्घके विश्व सम्मेलनम लैजैना प्रतिवद्धता व्यक्त कर्ले बाटै ।
दुई दिनसम्म सञ्चालन हुइना सम्मेलनम जलवायु परिवर्तनके जैविक विविधताम पर्ना असर, जलवायु न्याय, जलवायु वित्त, नेपालके संरक्षणम सहअस्तित्वके सवाल, हिमाली अर्थतन्त्र ओ जलवायु परिवर्तन, हिमालके लाग जलवायु वित्तके आवश्यकतालगायत विषयम वैज्ञानिक, अध्येताहूकन कार्यपत्र प्रस्तुत कर्ना कार्यक्रम रहल बा । सो कार्यपत्रम व्यापक छलफल कैके काठमाडौँ घोषणापत्र जारी  हूइल बा । 
सम्मेलनसे पारित करल विषयहूकन सरकार आगामी दिनम नीति निर्माण कर्ले से, योजना ओ कार्यव्रmम तर्जुमा कर्ले से ध्यान देहेपर्ना बाट सम्मेलनम सहभागी वैज्ञानिक, प्राध्यापक, अनुसन्धानकर्ताहूक्र आग्रह कर्ले बाटै । 
२०६३ असोज ७ गते तत्कालिन वनमन्त्री गोपाल राई, नेपालके लाग फिनल्याण्डके राजदुत एम. पाउली, तत्कालिन वन मन्त्रालयके सचिव दामोदर पराजुली, सहसचिवद्वय नारायणप्रसाद पौडेल, शरदकुमार राई, भूगोलविद् डा. हर्क गुरुङ, संरक्षणविद् डा. तीर्थमान शाक्य, संरक्षण साझेदार ओ दातृ निकायके उच्च पदस्थ, विदेशी संरक्षण क्षेत्रम लागल अध्येताहूक्र स्वदेशी कैके २४ जनाके ताप्लेजुङके घुन्साम हेलिकोप्टर दुर्घटनाम पर्के मृत्यु हूइल रहे । 
कञ्चनजङ्गा संरक्षण क्षेत्र स्थानीय समुदायहूकन हस्तान्तरण कर्ना कार्यक्रम जैना क्रमम सो दुर्घटना हूइल रहे । सोही दिनके सम्झनाम नेपाल हरेक वर्ष असोज ७ गते राष्ट्रिय संरक्षण दिवस मनैती आइल बाटै ।  





Share :
Shares: 0