कैलालीके धनगढी उपमहानगरपालिका–३ बोराडाँडीस्थित शिवनगर टोलके किसान जंगली जनावरहुक्र खेतीबाली नष्ट कैके हैरानी हुइल बाटै । डिलाशैनी सामुदायिक वनमे बसोबास कर्ना जंगली जनावर रातके समयमे खेतबारीमे पैठके अन्नबाली ओ फलफूल नष्ट करल स्थानीय किसान समस्यामे परल बाटै ।
शिवनगर टोलके किसानहुक्र लगाइल धान, गहुँ, केरा, तिल ओ मासलगायतके बाली बर्सेनि जंगली जनावरहुक्र खैना ओ खानके नष्ट कर्ना करल बाटै । विशेषकैके बँदेल, नीलगाई, चित्तल ओ बाँदरके कारण खेतीबालीमे क्षति पुग्ना करल स्थानीयके भनाइ बा । वर्षभरि मेहनत कैके लगाइल बाली भित्रैना बेलामे जंगली जनावरहुक्र नष्ट कैके किसानहुकनके श्रम ओ लगानी खेर जैना हुयल बा ।
डिलाशैनी सामुदायिक वन लग्घके बसोबास कर्ती आइल कलशीदेवी धानुकके अनुसार जंगली जनावर रातके समयमे खेतबारीमे एैना करल बाटै । यहेवर्ष उहाके धान खेतीमे समेत क्षति पुगल बा । कलेसे तिल ओ मासखेतीमे भारी नोक्सानी हुइल बा । हरेकवर्ष यहे समस्या दोहोरैना कर्ले से फेन् समाधानके लाग प्रभावकारी पहल हुइ नैसेकल उहाके गुनासो बा ।
धानुकके लाग यी वर्षके क्षति किल समस्या नैहोके। वर्षौंसे जंगली जनावरसे खेतीबाली नष्ट कर्ती आइल खेतीपातीसे हुइना आम्दानीसमेत अनिश्चित बन्ती गील बा । खेतीपातीमै निर्भर किसानहे यकर आर्थिक समस्यासमेत थप्ना करल बा । शिवनगर टोलकै औरे बासिन्दा पदमबहादुर बिष्ट फेन जंगली जनावरके उपद्रके कारण खेतीपाती कर्ना कठिन हुइल बतैल । टोलके अधिकांश बासिन्दाके मुख्य पेसा कृषि होके जनावरले बाली नष्ट कैके धेर परिवार प्रभावित हुइल उहाके भनाइ बा ।
बिष्टके अनुसार कञ्चनपुरके लालझाडी क्षेत्र हुँइती कृष्णपुर नगरपालिकाका सामुदायिक वन्वमसे जंगली जनावर मोहना नदीया तर्के बोराडाँडीस्थित डिलाशैनी सामुदायिक वनमे एैना करल बाटै । कैलाली ओ कञ्चनपुरके सीमावर्ती क्षेत्रमे वनजंगल जोड्के जनावरके आवतजावत हुइना करल स्थानीयके भनाइ बा ।
डिलाशैनी सामुदायिक वन आजरपाजर तारजालीके उचित व्यवस्था नैहोके जंगली जनावर सजिलै खेतबारीमे प्रवेश कर्ना करल बाटै । वनसे जनावर बस्ती ओ खेतीयोग्य जमिनमे पैथे नैदेहे लाग आवश्यक व्यवस्था नैहोके किसानहुक्र वर्षेनि क्षति बेहोरे पर्ना विष्ट बतैल । उहाके अनुसार वर्षौंसे समस्या भोग्ती आइल फेन वन समिति, स्थानीय तह ओ प्रदेश सरकारसे दीर्घकालीन समाधानके लाग पर्याप्त पहल हुइ नैसेकल हो ।
यकरआघे किसानहुक्र रातके समयमे खेतमै टहरा बनाके खेतीबालीके पहरा देना करल रल । जंगली जनावरसे बाली जोगाइलाग रातभर जाग्राम बैठपर्ना बाध्यता हुइल से फेन् पछिल्लो समय यी सम्भव हुइ छोडल स्थानीय बतैठ । रोजगारीके लाग गाउँके कुछ युवा भारत ओ अन्य देश जाके खेतबारीमे पहरा देना जनशक्ति घटल बा । महिलाहुक्र फेन रातक समयमे खेतमे जाके पहरा देना असुरक्षित महसुस कर्ना होके खेतीबाली जोगाइलाग थप कठिन हुइल उहाके भनाइ बा ।
मेहनत ओ लगानी कैके लगाइल बाली पक्ना समयमै नष्ट हुइ लाग्के किसान निराश बाटै । खेतीसे परिवारके जीविकोपार्जन कर्ती आइल उहा जंगली जनावरसे हुइना क्षतिसे आर्थिक भार थपर बा ।
स्थानीय किसानहुक्र जंगली जनावरक आवतजावत नियन्त्रण कर्ना वन क्षेत्र वरिपरि आवश्यक तारजालीके व्यवस्था कर्ना, क्षति न्यूनीकरणके प्रभावकारी उपाय अपनाइलाग ओ मस्याके दीर्घकालीन समाधान खोज्ना सम्बन्धित निकायसँग माग कर्ले बाटै । वर्षौंसे दोहोरैती आइल समस्याके समाधानके लाग वन समिति, स्थानीय तह ओ प्रदेश सरकारहुक्र समन्वय कैके ठोस कदम चालेपर्ना उहाके आग्रह बा ।