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मङ्गल, १० कात्तिक २०८३
कैलाली ओ कञ्चनपुरके थारु समुदायहुक्रे भब्य रुपमे अत्वारी पर्ब मनैतै
सोम, २९ भदौ २०८३ | थारु टीभी संवाददाता 65 0

कैलाली ओ कञ्चनपुर के थारु समुदाय हुक्र  आज धार्मिक ओ सांस्कृतिक पर्व अटवारी धुमधामसँगे मनैतै । विशेषकैके पुरुषहुक्र व्रत बैठके भीमके पूजा कर्ना यहे पर्वम धार्मिक आस्थासँगे पारिवारिक सम्बन्ध ओ मौलिक संस्कार जोड्ती आइल बा । अटवारीम व्रत बैठल पुरुषहुक्र आपन खैना खानाके कुछ आधा भाग दिदीबहिनी, फुपू ओ छाइनहे देना परम्परा फेन थारु समुदायम मनैती आइल बाट ।  समयसँगे पर्व मनैना शैलीम परिवर्तन एैले से फेन  यकर मौलिकता जोगैना प्रयास जारी बा । 
अटवारी थारु समुदायके महत्वपूर्ण धार्मिक ओ सांस्कृतिक पर्व हो । धार्मिक आस्था, पारिवारिक सुख–शान्ति, समृद्धि ओ सामाजिक सद्भावके लाग यी पर्व मनैना कर्थ ।
पश्चिम नेपालके विभिन्न जिल्लामे बसोबास कर्ना थारु समुदायहुक्र आपन स्थानीय परम्परा ओ चलनअनुसार अटवारी मनैती आइल बाटै । 
‎अटवारीके तयारी कुछ दिनआघेसे  सुरु हुइथ । घर–आँगन सरसफाइ कर्ना, पूजा सामग्री जुटैना ओ  विभिन्न परिकारके लाग आवश्यक सामग्री तयार पर्ना कर्थ ।
‎विशेषकैके व्रतालुके लाग परिवारके महिलाहुक्र विभिन्न परिकार तयार पर्ना चलन बा  ।
‎अटवारीके अघिल्लो दिन व्रत बैठना ‘दर’ खैना चलन बा । दरम मछी, घोंघी, तरकारी लगायतके परिकार खैना कर्थ । भन्सरिया भात खाके  व्रत सुरु हुइत ।
‎अत्वारी पर्वके दिन व्रतालुहुक्रे बिहानीसे व्रत बैठ्ठ । कोनोकोनो स्थानम दिनभर अन्न ओ पानीसमेत नैखाके निराहार वर्त बैठ्ना चलन बा  ।
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‎व्रत बैठल पुरुषहुक्र आपन हातले विभिन्न परिकार तयार पर्थ । अण्डीके रोटी, खुरमा, बरिया, हलुवालगायतके परिकार बनैथ  ।
‎परिकार तयार होके नदी ओ तलवमे जाके पोहैना  परम्परा फेन बा । 
‎व्रत बैठना, परिकार बनैना ओ पूजा कर्ना परम्पराबारे प्रतिक्रिया ।
‎पोहाके घर फिर्ता होके अग्रासन ओ पूजाके तयारी कथै । घरके ज्येष्ठ सदस्यसे पूजा सुरु कर्थ ओ ओकरपाछे क्रमशः अन्य सदस्यहूक्र पूजा कर्ना चलन बा ।गोबर ओ पानीले सफा करल ठाउमे अगरबत्ती, सरीके धूपलगायत पूजा सामग्री तयार पर्थ । व्रत बैठल परिवारके सदस्यहुक्र भीमहुकन समझके पूजा कर्थ ।
‎थारु समुदायम अटवारी पर्व भीमसँगे जोडल धार्मिक विश्वासके आधारम मनैथै   ।पूजा सम्पन्न होके किल व्रतालुहुक्र फरार कर्ना कर्थै । अण्डीके रोटी, खुरमा, बरिया, हलुवासँगे केरा, आँप, काँक्रालगायतके फलफूल खैथै  ।
‎अटवारीके विशेषता व्रत ओ पूजाम किल सीमित नैहो । यहेसँगे जोडल अग्रासनके परम्पराहे फेन पारिवारिक सम्बन्धहे बलियो बनैती आइल बा । 
‎ ‎अग्रासनके महत्व ओ दिदीबहिनी  फुपूसँगके सम्बन्धबारे प्रतिक्रिया ।
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‎थारु समुदायम दिदीबहिनी छाइ ओ फुपूसँगके सम्बन्धहे विशेष महत्व देती आइल बा । ‎यहे कारण अटवारी धार्मिक पर्वसँगै सामाजिक सम्बन्ध बलियो बनैना पर्वके रूपम फेन स्थापित बा  ।
‎अटवारीके अर्को महत्वपूर्ण पक्ष नयाँ पुस्तामे संस्कार ओ संस्कृति हस्तान्तरण कर्ना हो ।
‎पहिले अटवारीके व्रत, पूजा, परिकार बनैना विधि ओ अग्रासन देना चलन घरके ज्येष्ठ सदस्यसे नयाँ पुस्ताहुक्रे सिक्ती आइल बाटै । ‎
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