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मङ्गल, १० कात्तिक २०८३
सुदूरपश्चिममे पाँच सय ज्यादा मन्दिरके योजनामे झण्डै ७० करोड, प्रमुख गन्तव्य ओझेलमे
सोम, ०९ कात्तिक २०८३ | थारु टीभी संवाददाता 8 0

सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकारसे चालु आर्थिक वर्ष २०८३÷८४ मे मन्दिर निर्माणके योजनामे झण्डै ७० करोड रुपैयाँ विनियोजन कर्ले बाटै ।
धार्मिक पर्यटन प्रवद्र्धनके नाममे प्रदेश सरकारहुक्र समुदाय विशेषके मन्दिर निर्माण ओ मर्मतके योजनाहे प्राथमिकता देहेल बा । प्रदेश पर्यटन विकास कार्यक्रम कार्यान्वयन इकाइमार्फत कार्यान्वयन कर्ना कैके सरकारहुक्र ५०३ थो मन्दिरके योजनामे बजेट छुट्याइल बाटै । यकरबाहेक स्थानीय तहहे हस्तान्तरण करल दर्जनौं मन्दिर निर्माणके योजना फेन बा । यकर धार्मिक संरचना निर्माणमे प्रदेश सरकारके लगानी अभीन भारी रहल देखाइत ।
२०७४ सालसे मन्दिर निर्माणके योजनामे बजेट विनियोजन कर्ती आइल प्रदेश सरकारहुक्र यहे वर्ष फेन पुरानै प्रवृत्तिहे निरन्तरता देहेल बा ।उद्योग, पर्यटन, वन ओ वातावरण मन्त्रालयअन्तर्गत रहल इकाईहे नौवटै जिल्लामे मन्दिर निर्माण ओ मर्मत, मन्दिर परिसरके सडक, ढल, खानेपानी, विद्युत्, शौचालय ओ साधुसन्त निवासलगायतके संरचना निर्माण कर्ना योजना आघ सारल बाटै । 
गत आर्थिक वर्ष २०८२÷८३ मे प्रदेश सरकारसे २०४ थो मन्दिर ओ चर्च निर्माणके योजनाके लाग ३२ करोड २२ लाख रुपैयाँ विनियोजन कर्ले रहित ।  ओकर तुलनामे चालु आर्थिक वर्षमे मन्दिरके योजनाके संख्या दुई गुणा पुगल बा कलेसे बजेट दोब्बरसे ज्यादा हुइल बा । प्रदेश सरकारहुक्र यहेवर्ष मन्दिरके योजनामे करल लगानीसे धार्मिक संरचना निर्माणहे प्राथमिकतामे धरल देखाइत । 
’समुदाय विशेषके धार्मिक संरचना निर्माणहे पर्यटन प्रवद्र्धनसँग जोड्के बजेट विनियोजन कैके ओम्नेसे प्राप्त हुइल प्रतिफलके मूल्याङ्कन विगतसे हुइल नैहो ।,’ सत्तारुढ दलके एक सांसद , ’स्थानीय समुदायसे नियमित पूजा कर्ना सामान्य मन्दिर ओ आन्तरिक ओ बाह्य पर्यटक आकर्षित करे सेक्ना  धार्मिक गन्तव्यबीच स्पष्ट भिन्नता छुट्याए नैसेक्के बजेटके प्रभावकारिताउपर प्रश्न उठल बा ।’
प्रदेशके सात पहाडी जिल्लामे रहल भगवतीके मन्दिर ओ प्रमुख पर्यटकीय गन्तव्यमे  तुलनात्मक रूपमे पर्याप्त बजेट विनियोजन हुइ सेकल नैहो । पर्यटक आकर्षित करे सेक्ना धार्मिक ओ प्राकृतिक सम्पदाके पूर्वाधार विकासमे जोड देहेपर्नामे कुलदेवके मन्दिर निर्माणमे बजेट केन्द्रित कर्ना पुरान प्रवृत्तिसे यहेवर्ष फेन निरन्तरता पाइल बा ।
प्रदेश सरकारसे नौ वर्षके अवधिमे झण्डै दुई हजार मन्दिर निर्माणके योजना आघ बढासेकल बा ।’भारी संख्यामे धार्मिक संरचना निर्माण कैके पर्यटन क्षेत्रमे परल प्रभाव, स्थानीय रोजगारी सिर्जना ओ आर्थिक लाभके अवस्था कसी बा कना छ  विषयमे स्पष्ट मूल्याङ्कन आवश्यक देखाइल बा ।, यी सांसद कलै, ’धार्मिक पर्यटनके विकासके लाग बजेट खर्च कैके योजनाके संख्या बढैना कलेसे पर्यटकीय सम्भावना, पूर्वाधारके आवश्यकता ओ ओम्नेसे प्राप्त हुइल प्रतिफलहे प्राथमिकता देहेपर्ना देखाइत । 


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