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मङ्गल, १० कात्तिक २०८३
दुई तिहाइसे तोकल राजधानी कागजमै सीमित
मङ्गल, १३ असोज २०८३ | थारु टीभी संवाददाता 40 0

सुदूरपश्चिम प्रदेशके स्थायी राजधानी कागजम सीमित बनल बा । प्रदेश सभाके दुई तिहाइ बहुमतसे वनक्षेत्रम राजधानी तय कर्के कार्यान्वयनम नैआके कागजम सीमित बनल बा ।  प्रदेश राजपत्रम प्रदेशके स्थायी राजधानी बा तर तोकल स्थानम भौतिक रूपम नैहो ।
२०७५ साल असोज १२ म बैठल तत्कालीन प्रदेश सभाके बैठकसे दुई तिहाइ बहुमतसे कैलालीके गोदावरी नगरपालिका–२ ओ ४ म पर्ना वनक्षेत्रम प्रदेशके स्थायी राजधानी टुङ्गो लगाइल रहित । तर सदनके बहुमतसे तोकल राजधानी आठ वर्ष पुग्लेसे फेन घोषणामै सीमित बा । 
राजधानी निर्माणके लाग सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकारहूक्र नेपाल सरकारसे जग्गाके भोगाधिकार प्राप्त करे नैसेकल हो । अस्तक कैके वनक्षेत्रम राजधानी बनैना निर्णयविरुद्ध सर्वोच्च अदालतम परल दुई थो मुद्दा राजधानी निर्माणके मुख्य बाधक बनल रहे । अधिवक्ताद्वय देवीकुमारी जोशी ओ मनिषकुमार श्रेष्ठ सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकारविरुद्ध सर्वोच्चम रिट दायर कर्ले रहित । मुद्दा परल कारण नेपाल सरकारहूक्र जग्गाके भोगाधिकार प्रदेश सरकारहे देहेल नैहो ।
दुनू रिटउपर हालसम्म सुनुवाइ हाके रिट खारेज हूइल मुख्य न्यायाधिवक्ताके कार्यालयके सूचना अधिकारी सत्यराज पडाल जानकारी देहेल बाटै । उहाँ फैसलाके पूर्ण पाठ  एैना बाँकी रहल बताइल बाटै । “गोदावरीम राजधानी बनैना निर्णयविरुद्ध परल रिट अब बाधक नैहूइत । दुनू रिट खारेज होसेकल बा । आब राजधानी कैया बनैना, का कर्र्ना कैके उहाँ कल ।
यहे मुद्दाके कारण राजधानी निर्माण सुरुसमेत नैकैके अघिल्लो कार्यकालके प्रदेश सरकारके अवधि ओराइल रहे । दोस्रो कार्यकालके प्रदेश सरकारहूक्र फेन मुद्दाकै कारण अभिन सम्म राजधानीके काम आगे बढै नैसेकल हूइत ।
राजधानीके निर्माण सुरु करेलाग  प्रदेश सरकारहूक्र आर्थिक वर्ष २०७७÷७८ ओ आव २०७८÷७९ म क्रमशः दुई करोड ७२ ओ दुई करोड ७४ लाख कैके साढे पाँच करोड रुपियाँ बजेट फेन विनियोजन कर्ले रहित ।  तर काम हुइ नैसेकल हो । विनियोजित बजेट फ्रिज हूइल रहे । आठ वर्षसम्म राजधानी निर्माणके सुरुवातसमेत हुइ नैसेक्के प्रदेश सरकारहूकन थप चुनौती थपल बाटै । एकओहर आबे प्रदेश सरकारके कार्यकालके अवधि ओराइलागल बा कलेसे औरे ओहोर राजधानी बनाइपर्ना नैतिक दबा । 
स्थायी राजधानीके सवालम प्रदेश सरकारसँग गोदावरीके विकल्प नैरहल मुख्यमन्त्री खगराज भट्टके ठहर बा । उहाँ राजधानी बनाइ नैसेक्के ओकर मूल्याङ्कन जनतासे कर्ना उल्लेख कर्ले बाटै । गोदावरीके विकल्पम गील प्रदेश सभाके दुई तिहाइ बहुमतसे सहमति ओ प्रदेश सभाके सामूहिक सङ्कल्प आवश्यक पर्ना मुख्यमन्त्री भट्टके भनाइ रहे ।
अर्थ विकास ओ प्राकृतिक स्रोत समितिके सभापति घनश्याम चौधरीे प्रदेश सभाके दुई तिहाइ बहुमतसे टुङ्गो लगाइल राजधानी कार्यान्वयन हुइपर्नामे जोड देहेल बाटै । यद्यपि यकर विषयम सत्तारूढ दलबिच छलफल हुइ नैसेकल उहाँके भनाइ बा । 
२०७५ साल साउन २४ गते बैठल प्रदेश सभाके बैठकहे राजधानी तोक्ना ओ नाम प्रस्ताव कर्ना नेकपा (एमाले) के तत्कालीन सचेतक तारा लामा तामाङके संयोजकत्वम पाँच सदस्यीय विशेष सुझाव समिति बनाइल रहित । सोही समितिसे गोदावरी नगरपालिकाम राजधानी ओ प्रदेशके नाम सुदूरपश्चिम सिफारिस कर्ले रहित । प्रदेशके स्थायी राजधानी नैबन्के हालसम्म अस्थायी राजधानी धनगढीसे प्रदेश सरकार सञ्चालन हूइल बा । सरकार सञ्चालनके सब संरचना अस्थायी राजधानीमै निर्माण हूइती बा । 



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