सुदूरपश्चिमके विभिन्न क्षेत्रमे वन्यजन्तुके आक्रमणसे मनैनके ज्यान जैना ओ मानवीय गतिविधिसे वन्यजन्तु फेन मर्ना घटना दोहोरिती रहल बा । तर, यी घटनाके कारण वन्यजन्तु बस्तीमे पैठ्ना किल नैहोक, हुकनके नङ्ना परम्परागत डगर ओ बासस्थानमे मानव अतिक्रमण बढल बा । वन संरक्षणकर्मीहुकनके अनुसार भारतके दुधुवा राष्ट्रिय निकुञ्जसे नेपालके लालझाडी वन हुँइती चुरे क्षेत्रसम्म वन्यजन्तुके आवागमन हुइना करल बा । कैलाली ओ कञ्चनपुरके मोहना–लालझाडी क्षेत्र हात्ती ओ बाघलगायत वन्यजन्तुके महत्त्वपूर्ण जैविक मार्ग हो। तर, वन्यजन्तु ओहोरदोहोर कर्ना यहे मार्गमे सडक, बस्ती ओ अन्य संरचना विस्तार होके हुकनके आवागमन प्रभावित हुइल बा । जंगलमे आहारके अभाव ओ परम्परागत मार्गमे बढ्ती अवरोधहे मानव–वन्यजन्तु द्वन्द्व चर्कती गिल संरक्षणकर्मीहुकनके भनाइ बा । धनगढी उपमहानगरपालिका–३ के वडाध्यक्ष ओ वन संरक्षणकर्मी राजबहादुर ऐरके अनुसार मोहना नदीया आसपास हात्ती लगायतके वन्यजन्तु देखैना नयाँ घटना नैहो । वन्यजन्तु पहिलेसे प्रयोग कर्ती आइल मार्गमे मानव बस्ती विस्तार होके आब द्वन्द्व बढ्ती रहल उहा बतैल ।
सामुदायिक वन समन्वय समितिका संस्थापक अध्यक्ष ओ सुदूरपश्चिम प्रदेशसभाके पूर्वसदस्य महेशदत्त जोशी फेन जैविक मार्गमे बढल अवरोधहे मानव–वन्यजन्तु द्वन्द्वके प्रमुख कारण मन्थ । तीन दशकसे लालझाडी जैविक मार्गके संरक्षणमे काम कर्ती आइल जोशीके अनुसार पहिल वन्यजन्तुके आवागमन सहज हुइना क्षेत्रमे आब बस्ती विस्तार हुइल बा । ‘कब हात्ती लालझाडीमे, कब हात्ती दाङमे कना त गीत बा । यमेसे फेन लालझाडी ओ दाङमे हात्तीके आवागमन पुरान बा कना पुष्टि हुइथ,’ जोशी कथ, ‘तर आब मानव बस्ती विस्तार हाके विभिन्न ठाउँमे जैविक मार्गके सम्पर्क टुटल बा । ’
दुधुवासे नेपालतर्फ वन्यजन्तु एैना प्रमुख मार्गमध्ये कञ्चनपुरके डोकेबजार क्षेत्र फेन एक हो। तर, आब डोकेबजारमे भारी बस्ती बैठल बा । जोशीके अनुसार कञ्चनपुरके करिब १३० किलोमिटर सीमा भारतसँग जोडल बा । सीमावर्ती निकुञ्ज ओ संरक्षण क्षेत्रमे बसोबास कर्ना वन्यजन्तुके लाग फेन यी सीमा प्राकृतिक आवागमनके महत्त्वपूर्ण क्षेत्र हो। तर, बसाइँसराइके लाग प्रयोग हुइना धेउर मार्गमे मानव बस्ती विस्तार हाके वन्यजन्तुके आवागमन प्रभावित हुइल बा । दुधुवा राष्ट्रिय निकुञ्ज, शुक्लाफाँटा राष्ट्रिय निकुञ्ज ओ लालझाडी करिडोर आसपास वन्यजन्तुके आवागमन हुइना करल बा । उहाहुकनके परम्परागत मार्गमे बस्ती विस्तार होके वन्यजन्तु खेतबारी ओ मानव बस्तीतर्फ पुग्ना ओ ओम्नेसे धनजनके क्षति हुइना करल जोशी बतैथ ।
मोहना–लालझाडी करिडोर बाघके आवागमनके लाग फेन महत्त्वपूर्ण क्षेत्र हो। भारतके दुधुवा राष्ट्रिय निकुञ्जमे डमरु जन्माइल पाछे उहिन् भाले बाघसे जोगाइलाग सुरक्षित स्थान खोज्ती पोथी बाघ नेपालतर्फ उैना करल संरक्षणकर्मीहुक्र बतैथ । डमरु हुकै क्रममे पोथी बाघसे स्थान परिवर्तन कैके लालझाडी करिडोर मोहना नदीयाके तटीय क्षेत्रसम्म पुग्ना करल मोहना–लालझाडी संरक्षित क्षेत्रके पूर्वसचिव ओ लालझाडी गाउँपालिकाके अध्यक्ष निर्मल राना बतैथी । तर, पहिल बाघसे प्रयोग कर्ना मार्गमे आब बस्ती विस्तार होके दुधुवासे नेपालतर्फ आउजाउ कर्ना सहज नैहुइल उहाके भनाइ बा ।