सुदूरपश्चिम प्रदेश सरकार बजेटविहीन हुइल तीन महिना पुग्लसे फेन सरकारहुक्र फेर बजेट शून्यता अन्त्य कर्ना नयाँ समयसीमा तोकल बा । पटकपटक बजेट लन्ना मिति तोक्के फेन असफल हुँइती आइल प्रदेश सरकारहुक्र यहेपटक दसैँआघ से बजेट लन्ना दाबी कर्ले बाट । ओकर लाग प्रदेशसभासे बजेट लन्ना प्रक्रिया जटिल बन्ना अध्यादेशके विकल्पम फेन जैसेक्ना प्रदेश सरकारहुक्र जनाइल बाटै ।
प्रदेश सरकारके प्रवक्तासमेत रहल उद्योग, पर्यटन, वन तथा वातावरणमन्त्री प्रकाश रावल दसैँआघ बजेट शून्यता अन्त्य कर्ना बतैल । संसद्से बजेट लन्ना समय लग्ना होके छोटी प्रक्रियाके लाग अध्यादेशके विकल्पमे समेत छलफल हुइती रहल उहाके भनाइ बा ।
प्रदेश सरकारके बजेटसम्बन्धी विवादमे सर्वोच्च अदालतमे आज सुनुवाइ हुँइता । अधिवक्ता मनिराम उपाध्याय दायर करल उत्प्रेषणसम्बन्धी रिटमे सर्वोच्च अन्तरिम आदेश जारी कर्ना ओ नैकर्ना विषयमे छलफल कर्ना दुनु पक्ष बोलाइल बाट । अदालत हुक्र यकरआघ प्रदेश सरकारसँग लिखित जवाफसमेत माग कर्ले रल ।
यकरआघ असोज २१ गते प्रदेशसभाम बजेट प्रस्तुत कर्ना सरकारर्के तयारी रहे । तर, बजेटसम्बन्धी विवादमे सर्वोच्च अदालतसे जवाफ मग्ती छलफलके लाग बोलाके प्रक्रिया रोकल रहे । तर बजेट प्रस्तुतीके कार्यसूची धतीई २४ गतेके लाग प्रदेशसभा बैठक बोलाइल बाटै तर, अदालतके आजके निर्णयसे बजेट सार्वजनिकके प्रक्रियाहे थप स्पष्ट पर्ना बताइल बाटै ।
अदालतहुक्र बजेट लन्ना दगर खोल्देलसे अध्यादेशमार्फत बजेट लन्ना विकल्पमे छलफल केन्द्रित हुइल एक सरकारी अधिकारीहुक्र बतैल । उहाके अनुसार सरकारहुक्र २१ असोजमे सार्वजनिक कर्ना तयारीमे रहल बजेटप्रति सरकारके नेतृत्व कर्ती रहल नेपाली कम्युनिस्ट पार्टीसमेत सन्तुष्ट नैरहित । ‘ओहे बजेट प्रदेशसभामे प्रस्तुत हुइलसे फेन् पारित हुइना सम्भावना कम देखाके आबे पूर्ण बजेटके सट्टा चालु खर्च सञ्चालनके लाग आवश्यक बजेट अध्यादेशसे लन्ना विषयमे छलफल केन्द्रित हूइल बा ।,’ यी अधिकारीसे ।
संवैधानिक व्यवस्थाअनुसार अध्यादेश लन्ना आघ प्रदेशसभाके चालु अधिवेशन अन्त्य करेपर्ना रहत । ओकर लाग सरकारहुक्र सिफारिस करलपाछे प्रदेश प्रमुखलसे अधिवेशन अन्त्य करे सेक्जैत । अधिवेशन अन्त्य हुइल २४ घण्टापाछे किल अध्यादेश जारी करे सेक्ना व्यवस्था बा ।