कृषि, वन ओ पर्यावरण मन्त्री गीता चौधरीे डिजिटल गभर्नेन्स ओ सुशासनहे प्रथामिकता धर्ती मलके लाग काम हुइती रहल बताइल बाटै ।
रासायनिक मलके खरिद प्रक्रिया हलि, सहज ओ पारदर्शी बनैनाके सँग मलके वितरण प्रणालीहे व्यवस्थित कर्ना मन्त्री चौधरीहुक्रे नीतिगत ओ प्राविधिक सुधारके पहल आघ बढैना हुइल बाटै । मन्त्री चौधरी किसानके लाग मल उपलब्ध कर्ना विषेश प्रथामिकता देहेल बताइल बाटै ।
मल खरिद प्रक्रियामे देखाइल जटिलता न्यूनीकरण कर्ना कानुनी संशोधनके पहीलेसे मलके मौज्दात, आयात ओ बिक्रीके विवरण डिजिटल प्रणालीमार्फत सार्वजनिक कर्ना व्यवस्था कार्यान्वयनमे आइल बा ।
रासायनिक मलके खरिद प्रक्रियाहे हलि बनाइलाग सार्वजनिक खरिद ऐन, २०६३ ओ सार्वजनिक खरिद नियमावली, २०६४ संशोधनके लाग प्रस्ताव प्रधानमन्त्री ओ मन्त्रीपरिषद्के कार्यालय ओ सार्वजनिक खरिद अनुगमन कार्यालयमे पेस कर्ले रहित । सोही प्रक्रियाअन्तर्गत सार्वजनिक खरिद नियमावलीके १४ औँ संशोधनमार्फत मल खरिदहे सहज बनैना व्यवस्था हुइल बा ।
ओस्तके, रासायनिक मलके आयात ओ वितरणहे पारदर्शी ओ सहज बनाइलाग मल व्यवस्थापन सूचना प्रणाली (एफएमएस) निर्माण कैके कार्यान्वयनमे आइल बा । उक्त प्रणालीमार्फत मलके मौज्दात ओ बिक्रीसम्बन्धी विवरण वास्तविक समय (रियल टाइम) मे उपलब्ध हुइना व्यवस्था बा ।
एफएमएस प्रणालीमे कृषकहुक्र आपन लग्घके मल विक्रेता सहकारी ओ डिलरसँग उपलब्ध मलके मौज्दात कत्रा बा ? कना जानकारी लग–इन नैकैके हेरे सेक्ना व्यवस्था बा । ओस्तके, अनुदानमे खरिद कैके लानल मल कीहिन ओ कत्रा परिमाणमे बिक्री कर्ना हो ? कना विवरणसमेत प्रणालीमार्फत हेरे सेक्ना व्यवस्था कर्ले बाटै ।
मल वितरण प्रणालीमे पारदर्शिता कायम कर्ना मलके डिलरसे एफएमएसमे बिक्रीसम्बन्धी विवरण अनिवार्य रूपमे प्रविष्ट करेपर्ना व्यवस्था कर्ले बाटै । यकर सँगमे मलके मौज्दात, आयात ओ बिक्रीसम्बन्धी विवरण नियमित रूपमे मन्त्रालयके वेबसाइटमार्फत साप्ताहिक रूपमे सार्वजनिक कर्ती आइल बाटै ।
यमेसे मलके उपलब्धता ओ वितरण अवस्थाबारे कृषक ओ सर्वसाधारणहे जानकारी प्राप्त करेसेक्ना ओ अनुदानके मल वितरणहे थप पारदर्शी ओ व्यवस्थित बनाइलाग सहयोग पुग्ना मन्त्री चौधरीके भनाइ बा ।
यहेबिचमे, मलके नियमनसम्बन्धी कानुनी व्यवस्थाहे समयानुकूल बनाइलाग मन्त्री चौधरी मल नियन्त्रण आदेश, २०८३ के मस्यौदा तयार हुइल बताइल बाटै । हाल प्रचलनमे रहल रासायनिक मल (नियन्त्रण) आदेश, २०५५ मे मुख्यतः रासायनिक मलके नियमनसम्बन्धी व्यवस्था रहल बा ।
प्राङ्गारिक ओ जैविक मल ओ बायोस्टिमुलेन्टके प्रयोग बढ्तीगील वर्तमान अवस्थामे तिनके नियमनके लाग थप कानुनी आधार आवश्यक रहके मन्त्री चौधरी सो मस्यौदा तयार करेपर्ना बा ।
मस्यौदामे रासायनिक, प्राङ्गारिक ओ जैविक मललगायत सब प्रकारके मलहे समेट्नाकैके व्यवस्था प्रस्ताव कर्ले बाटै । उक्त मस्यौदा राय ओ सहमतिके लाग सम्बन्धित निकायसँग समन्वय हुइती बा । मन्त्री चौधरी कलै, “मल खरिद प्रक्रियामे नीतिगत सुधार, डिजिटल प्रणालीमार्फत मौज्दात ओ बिक्रीके अनुगमन ओ मलसम्बन्धी कानुनी व्यवस्थाके विस्तारहे मन्त्रालयसे मल आपूर्ति ओ वितरण प्रणाली सुधारके महत्वपूर्ण पहलके रूपमे आघ बढाइल बाटै । ’
रासायनिक मलके प्रयोग न्यूनीकरण ओ प्राङ्गारिक ओ जिवाणु मल प्रवर्धनसम्बन्धी आ.व.२०८३–८४ मे प्राङ्गारिक कृषि मल प्रवर्धन ओ अनुदान कार्यक्रमके लाग कृषि विभागमे ३५ करोड विनियोजन होके उक्त कार्यक्रम कार्यान्वयनके लाग कार्यविधिके ड्राफ्ट तयार हुइल जनाइल बाटै ।
ओस्तके, प्रदेश ओ स्थानीय तहमे प्राङ्गारिक कृषि प्रवर्धन, माटी स्वास्थ्य सुधार, हरियो मल प्रवर्धन–गोठ–खोर निर्माण ओ सुधार कार्यक्रमके प्रस्ताव ओ वजेट विनियोजन होके कार्यान्वयनके क्रममे रहल बा ।
रासायनिक मलके वितरण व्यवस्थाहे हली, पारदर्शी एवं प्रभावकारी बनैना अनुदानके मल वितरण व्यवस्थापन कार्यविधि, २०८२ स्वीकृत कैके कार्यान्वयनमे लन्ले बाटै ।
अनुदानके वितरणमे देखाइल समस्याके समाधानके लाग उक्त कार्यविधि परिमार्जनके प्रक्रिया सुरु कर्ले बाटै । यसक्रममे एफएमएसके क्षमता बढाइलाग ओ आवश्यक फिचरमे थप कैके अभीन प्रभावकारी ओ प्रयोगकर्तामैत्री बनाइलाग अपग्रेडिङ्ग कार्य कर्ले बाटै ।
अनुदानके मल विक्री वितरण, मूल्य ओ गुणस्तर लगायतके विषयमे हुइ सेक्ना चलखेल ओ गैर कानुनी कार्यहुकन रोक्ना ओ मल वितरणके प्रभावकारी रुपमे अनुगमन कर्ना सव जिल्ला प्रशासन कार्यालयहुकन परिचालन करेलाग २०८३ जेठ ६ मे गृह मन्त्रालयहे पत्राचार कर्ले रहित ।
मलखाद वितरणहे प्रभावकारी बनाइलाग अनुगमन लगायत आवश्यक व्यवस्था कर्ना सव प्रदेशके कृषि सम्वद्ध मन्त्रालयहे पत्राचार ओ फोनमार्फत अनुरोध कर्ले बाटै ।
मल वितरणमे भेदवाद करे नैपैना एवं सम्भावित कालोबजारी ओ अपचलन रोकेलाग तत्कालीन संघीय मामिला ओ सामान्य प्रशासन मन्त्रालयमार्फत अनुरोध कर्ले बाटै ।
दुनु कम्पनीके शाखा कार्यालय ओ डिपोहुकनहे भर्चुअल बैठक कैके आबे अवस्थामे मल वितरणमे चुस्तता, पारदर्शिता ओ सहज वातावरण बनाइ आवश्यक अनुगमन कर्ना निर्देशन देहेल बाटै ।
२०८३ जेठ २२ मे रासायनिक मलके गुनासो सुन्ना मन्त्रालय ओ प्रादेशिक मन्त्रालयमे सम्पर्क व्यक्ति तोक्के वेवसाइटमे जानकारी करल मन्त्रालयहुक्र जनाइल बाटै । सोही अनुसार गुनासो सम्वोधनके प्रयास कर्ना कर्ले बाटै ।